प्रश्न 1: कार्बन के दो गुणधर्म कौन-से हैं जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है?
उत्तर: कार्बन की विशाल संख्या के दो मुख्य कारण हैं:
- शृंखलन (Catenation): कार्बन में कार्बन के ही अन्य परमाणुओं के साथ आबंध बनाकर लंबी शृंखला बनाने की अद्वितीय क्षमता होती है।
- चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिसके कारण यह अन्य चार परमाणुओं (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन आदि) के साथ सहसंयोजक आबंध बना सकता है।
प्रश्न 2: सहसंयोजक आबंध (Covalent Bond) किसे कहते हैं? कार्बनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक कम क्यों होते हैं?
उत्तर: दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के एक युग्म की साझेदारी (Sharing) द्वारा बनने वाले आबंध को सहसंयोजक आबंध कहते हैं।
कार्बनिक यौगिकों के अणुओं के बीच **अंतर-अणुक बल (Inter-molecular force)** बहुत कमज़ोर होता है, इसलिए इन्हें तोड़ने के लिए बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं।
प्रश्न 3: समजातीय श्रेणी (Homologous Series) क्या है? उदाहरण के साथ समझाइए।
उत्तर: यौगिकों की ऐसी शृंखला जिसमें कार्बन शृंखला में स्थित हाइड्रोजन को एक ही प्रकार का **प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group)** प्रतिस्थापित करता है, उसे समजातीय श्रेणी कहते हैं।
उदाहरण: ऐल्केन श्रेणी (Methane: CH₄, Ethane: C₂H₆, Propane: C₃H₈)। इनके बीच हमेशा -CH₂ का अंतर होता है।
प्रश्न 4: साबुन की सफाई प्रक्रिया की क्रियाविधि (Mechanism) समझाइए।
उत्तर: साबुन के अणु के दो भाग होते हैं:
1. जलरागी (Hydrophilic): जो जल में घुलनशील होता है।
2. जलविरागी (Hydrophobic): जो तेल या मैल में घुलनशील होता है।
जब गंदे कपड़े को साबुन के पानी में डाला जाता है, तो जलविरागी हिस्सा मैल से चिपक जाता है और एक गोलाकार संरचना बनाता है जिसे **'मिसैल' (Micelle)** कहते हैं। जब पानी को हिलाया जाता है, तो यह मिसैल मैल को अपने साथ खींचकर बाहर निकाल देता है।
प्रश्न 5: संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में क्या अंतर है?
संतृप्त हाइड्रोकार्बन: वे कार्बन यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच केवल **एकल आबंध (Single Bond)** होता है (जैसे ऐल्केन)। ये कम अभिक्रियाशील होते हैं।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन: वे कार्बन यौगिक जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच **द्वि-आबंध (Double Bond)** या **त्रि-आबंध (Triple Bond)** होता है (जैसे ऐल्कीन और ऐल्काइन)। ये अधिक अभिक्रियाशील होते हैं।
प्रश्न 6: एथेनॉल से एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन को ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
उत्तर: क्योंकि इस अभिक्रिया में एथेनॉल के अणु में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है और हाइड्रोजन की कमी होती है। क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट जैसे ऑक्सीकारक एथेनॉल को ऑक्सीकृत करके एथेनॉइक अम्ल में बदल देते हैं।