अध्याय 3: पदार्थों का पृथक्करण

कक्षा 6 विज्ञान - NCERT अभ्यास के सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर

सारांश: किसी मिश्रण से उसके अवयवों को अलग करने की प्रक्रिया को पृथक्करण कहते हैं। इसके लिए हस्त-चयन, चालन, अवसादन, निस्तारण और निस्यंदन जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।

NCERT अभ्यास के प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1: हमें किसी मिश्रण के विभिन्न अवयवों को पृथक करने की आवश्यकता क्यों होती है? दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: मिश्रण के अवयवों को पृथक करने के दो मुख्य कारण हैं:
प्रश्न 2: निष्पावन (Winnowing) से क्या तात्पर्य है? यह कहाँ उपयोग किया जाता है?
उत्तर: वायु के झोंकों द्वारा किसी मिश्रण के भारी तथा हल्के अवयवों को अलग करने की विधि को 'निष्पावन' कहते हैं।
उपयोग: किसान इसका उपयोग अनाज के भारी दानों से हल्के भूसे को अलग करने के लिए करते हैं।
प्रश्न 3: पकाने से पहले दालों के किसी नमूने से आप भूसे एवं धूल के कण कैसे पृथक करेंगे?
उत्तर: दालों से भारी भूसे को 'हस्त-चयन' विधि द्वारा अलग किया जा सकता है। धूल के छोटे कणों को हटाने के लिए दालों को पानी से धोया जाता है, जिससे धूल पानी के साथ बह जाती है (निस्तारण विधि)।
प्रश्न 4: चालन (Sieving) से क्या तात्पर्य है? इसका उपयोग कहाँ होता है?
उत्तर: विभिन्न आकार के अवयवों को अलग करने के लिए छन्नी (चालनी) का उपयोग करना 'चालन' कहलाता है। इसमें छोटे कण छेद से निकल जाते हैं और बड़े कण ऊपर रह जाते हैं।
उपयोग: आटे से चोकर अलग करने में या निर्माण स्थल पर रेत से कंकड़ अलग करने में।
प्रश्न 5: रेत और जल के मिश्रण से आप रेत और जल को कैसे पृथक करेंगे?
उत्तर: इसके लिए हम 'अवसादन' और 'निस्तारण' विधि का उपयोग करेंगे:
  1. अवसादन: मिश्रण को कुछ देर स्थिर छोड़ देंगे जिससे भारी रेत नीचे बैठ जाए।
  2. निस्तारण: बर्तन को थोड़ा झुकाकर ऊपर का जल धीरे से दूसरे बर्तन में उड़ेल लेंगे।
प्रश्न 6: आटे और चीनी के मिश्रण को क्या पृथक करना संभव है? यदि हाँ, तो आप इसे कैसे करेंगे?
उत्तर: हाँ, इसे पृथक करना संभव है। हम 'चालन' विधि का उपयोग करेंगे। यदि हम मिश्रण को महीन छेद वाली चालनी से छानते हैं, तो आटा नीचे निकल जाएगा और चीनी के बड़े कण चालनी में ऊपर रह जाएंगे।
प्रश्न 7: 'संतृप्त विलयन' (Saturated Solution) किसे कहते हैं?
उत्तर: वह विलयन जिसमें किसी निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय पदार्थ (जैसे नमक या चीनी) नहीं घोला जा सके, उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।
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