ध्वनि का उत्पादन: ध्वनि कंपन (Vibration) द्वारा उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम के कणों को भी कंपित कर देती है।
1. ध्वनि का संचरण
ध्वनि एक यांत्रिक तरंग (Mechanical Wave) है जिसे चलने के लिए माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। **ध्वनि निर्वात (Vacuum) में गमन नहीं कर सकती।**
2. तरंगों के प्रकार
| अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal) |
अनुप्रस्थ तरंग (Transverse) |
| माध्यम के कण तरंग की दिशा में ही कंपन करते हैं। (जैसे- ध्वनि तरंगें) |
माध्यम के कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। (जैसे- प्रकाश तरंगें) |
प्रश्न 1: आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य (Wavelength) क्या हैं?
- तरंगदैर्ध्य ($\lambda$): दो क्रमागत संपीडनों या विरलनों के बीच की दूरी। इसका मात्रक मीटर (m) है।
- आवृत्ति ($f$): प्रति सेकंड होने वाले कंपनों की संख्या। इसका मात्रक **हर्ट्ज़ (Hz)** है।
वेग (v) = आवृत्ति (f) × तरंगदैर्ध्य ($\lambda$)
प्रश्न 2: प्रतिध्वनि (Echo) सुनने के लिए न्यूनतम दूरी कितनी होनी चाहिए?
उत्तर: ध्वनि के परावर्तन के कारण प्रतिध्वनि सुनाई देती है। स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए अवरोधक की दूरी कम से कम **17.2 मीटर** होनी चाहिए।
3. श्रव्यता का परिसर (Range of Hearing)
मानव कान के लिए सुनने की क्षमता का परिसर **20 Hz से 20,000 Hz** तक होता है।
- अश्रव्य ध्वनि (Infrasound): 20 Hz से कम आवृत्ति।
- पराध्वनि (Ultrasound): 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति।
प्रश्न 3: सोनार (SONAR) का उपयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर: इसका उपयोग समुद्र की गहराई मापने या पानी के नीचे छिपी वस्तुओं (जैसे- पनडुब्बी) का पता लगाने के लिए पराध्वनि तरंगों के माध्यम से किया जाता है।
4. मानव कान (The Human Ear)
मानव कान के तीन मुख्य भाग होते हैं:
- बाहरी कान (पिन्ना) - ध्वनि एकत्र करता है।
- मध्य कान - ध्वनि कंपनों को बढ़ाता है।
- आंतरिक कान - कंपनों को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक भेजता है।