अध्याय 8: बल तथा गति के नियम

कक्षा 9 विज्ञान | न्यूटन के नियम, जड़त्व और संवेग का सम्पूर्ण अध्ययन

बल (Force): बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की विराम अवस्था, गति की अवस्था या दिशा में परिवर्तन कर देता है। इसका मात्रक न्यूटन (N) है।

1. संतुलित और असंतुलित बल

2. न्यूटन के गति के नियम

गति का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम)

प्रत्येक वस्तु अपनी विराम अवस्था या एक समान गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है, जब तक उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे।
जड़त्व (Inertia): किसी वस्तु का वह गुण जो उसकी गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करता है। भारी वस्तुओं का जड़त्व अधिक होता है।

गति का द्वितीय नियम

किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगने वाले असंतुलित बल के समानुपाती होती है।
गणितीय रूप: F = m × a (बल = द्रव्यमान × त्वरण)

गति का तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम)

प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। ये दोनों बल अलग-अलग वस्तुओं पर कार्य करते हैं। उदाहरण- रॉकेट का उड़ना, बंदूक से गोली चलाने पर पीछे की ओर धक्का लगना।
प्रश्न 1: संवेग (Momentum) किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं।
p = m × v
इसका मात्रक kg m/s है।
प्रश्न 2: जब कोई बस अचानक रुकती है, तो आप आगे की ओर क्यों झुक जाते हैं?
उत्तर: जड़त्व के कारण। बस के साथ हमारा शरीर भी गति की अवस्था में होता है। अचानक ब्रेक लगने पर पैर तो बस के साथ रुक जाते हैं, लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा 'गति के जड़त्व' के कारण आगे की ओर बना रहना चाहता है।
प्रश्न 3: संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum) क्या है?
उत्तर: यदि वस्तुओं के समूह पर कोई बाहरी बल कार्य न करे, तो टकराने से पहले का कुल संवेग और टकराने के बाद का कुल संवेग बराबर रहता है।
← सभी पाठों की सूची देखें