पालमपुर का परिचय: पालमपुर एक काल्पनिक गाँव है जहाँ मुख्य क्रिया 'खेती' है। इसके अलावा यहाँ लघु-स्तरीय विनिर्माण, डेयरी और परिवहन जैसी गैर-कृषि क्रियाएँ भी होती हैं।
उत्पादन के चार कारक (Factors of Production)
वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए चार चीजें आवश्यक हैं:
- भूमि: जल, वन और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधन।
- श्रम: काम करने वाले लोग।
- भौतिक पूँजी: इसके दो भाग हैं:
- स्थायी पूँजी (औजार, मशीन, भवन)
- कार्यशील पूँजी (नकद पैसा और कच्चा माल)
- मानव पूँजी: ज्ञान और उद्यम।
प्रश्न 1: बहुविध फसल प्रणाली (Multiple Cropping) क्या है?
उत्तर: एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने को 'बहुविध फसल प्रणाली' कहते हैं। यह पैदावार बढ़ाने का सबसे सामान्य तरीका है।
हरित क्रांति (Green Revolution)
1960 के दशक के अंत में हरित क्रांति ने भारतीय किसानों को **HYV (High Yielding Varieties)** बीजों के द्वारा गेहूँ और चावल की खेती के तरीके सिखाए। इससे पैदावार तो बढ़ी लेकिन रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होने लगी।
प्रश्न 2: कार्यशील पूँजी (Working Capital) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: उत्पादन के दौरान भुगतान करने और कच्चा माल खरीदने के लिए जिस पैसे की आवश्यकता होती है, उसे 'कार्यशील पूँजी' कहते हैं। यह उत्पादन प्रक्रिया में खत्म हो जाती है (जैसे- नकद रुपया, सूत, मिट्टी आदि)।
प्रश्न 3: पालमपुर में गैर-कृषि क्रियाएँ कौन-कौन सी हैं?
पालमपुर में लगभग 25% लोग गैर-कृषि कार्यों में लगे हैं:
- डेयरी: लोग भैंस पालते हैं और दूध पास के गाँव शाहपुर में बेचते हैं।
- लघु विनिर्माण: जैसे गन्ने से गुड़ बनाना।
- दुकानदारी: जनरल स्टोर जहाँ स्टेशनरी और खाने-पीने का सामान मिलता है।
- परिवहन: रिक्शा, तांगा, जीप और ट्रक चलाने वाले लोग।