अध्याय 4: भारत में खाद्य सुरक्षा

कक्षा 9 अर्थशास्त्र | PDS, बफर स्टॉक और राशनिंग की व्याख्या

खाद्य सुरक्षा का अर्थ: खाद्य सुरक्षा का अर्थ है सभी लोगों के लिए सदैव भोजन की उपलब्धता, पहुँच और उसे प्राप्त करने की सामर्थ्य। इसके तीन मुख्य आयाम हैं: 1. उपलब्धता, 2. पहुँच, और 3. सामर्थ्य।
प्रश्न 1: बफर स्टॉक (Buffer Stock) क्या है और इसे क्यों बनाया जाता है?
उत्तर: भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से सरकार द्वारा अधिप्राप्त अनाज (गेहूँ और चावल) के भंडार को 'बफर स्टॉक' कहते हैं।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य कमी वाले क्षेत्रों में और समाज के गरीब वर्गों में बाजार कीमत से कम कीमत पर अनाज वितरित करना है, ताकि आपदा या खराब मौसम के समय भोजन की कमी न हो।

2. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)

भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा एकत्रित अनाज को सरकार राशन की दुकानों के माध्यम से समाज के गरीब वर्गों में वितरित करती है। इसे 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' कहते हैं। इन दुकानों को **'उचित दर वाली दुकानें'** भी कहा जाता है।

राशन कार्ड के प्रकार

कार्ड का प्रकार किसे दिया जाता है
अंत्योदय (AAY) निर्धनों में भी सबसे निर्धन लोगों के लिए।
बीपीएल (BPL) निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए।
एपीएल (APL) अन्य सभी लोगों के लिए।
प्रश्न 2: 'न्यूनतम समर्थित कीमत' (MSP) किसे कहते हैं?
उत्तर: बुवाई के मौसम से पहले सरकार फसलों की एक कीमत घोषित करती है, जिसे 'न्यूनतम समर्थित कीमत' कहा जाता है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाना और उन्हें अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है।
प्रश्न 3: अकाल (Famine) क्या है?
उत्तर: अकाल के दौरान खाद्यान्न की भारी कमी के कारण व्यापक मृत्यु होती है, जो भुखमरी और महामारी के कारण होती है। भारत में 1943 का **बंगाल का अकाल** सबसे भयानक था, जिसमें 30 लाख लोग मारे गए थे।
प्रश्न 4: खाद्य सुरक्षा में सहकारी समितियों की क्या भूमिका है?
उत्तर: सहकारी समितियाँ कम कीमत पर अनाज और अन्य वस्तुएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उदाहरण के लिए:
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